Nihal singh 11 Apr 2026 ग़ज़ल दुःखद #ग़ज़ल # हिन्दी शायरी #दिल का दर्द #मुहब्बत #जुदाई #निहाल सिंह 9962 0 Hindi :: हिंदी
तुम ज़िन्दगी से चली गई — फिर ये ख़लिश थमी क्यों नहीं, अश्क रुक गये हैं मगर साँस रुकी क्यों नहीं। दिल को यूँ बिखेर गई वो बिना शोर के, आवाज़ भी न टूटी — ख़ामोशी ढही क्यों नहीं। मैंने तो अपनी धड़कनों को समझा दिया था सब, फिर तेरी याद मुझसे पहले मरी क्यों नहीं। चेहरे बदल के रोज़ ही मिलता हूँ महताब से, आँख खुलते ही ये वहशत थमी क्यों नहीं। मैंने तुझे भुलाने को खुद की शक्ल भुला दी, फिर भी तेरी सदा दिल से मिटी क्यों नहीं। लम्हों ने जैसे वक़्त की तह में छुपा दिया मेरा प्यार, जो मेरी चाहत थी कभी, वो मुझे मिली क्यों नहीं। तू दूर है तो ठीक — ये दिल मान भी गया, फिर भी ये तेरी कमी दिल से गई क्यों नहीं। “निहाल” अपने दर्द को यूँ ही छुपाता रहा, सब कुछ तो मिट गया — ये याद मिटी क्यों नहीं।