संदीप कुमार सिंह 04 May 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाजिक हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 34923 0 Hindi :: हिंदी
होना भी तो चाहिए, पड़ा जेब में नोट। सब इच्छा तब पूर्ण हो, करूं खुशी से वोट।। होना भी तो चाहिए, मन में शुद्ध विचार। तभी ज्ञान उपदेश कर,खुशी करूं संसार।। होना भी तो चाहिए, सरल मधुर व्यवहार। फिर तो सबका साथ हो,मिलता विजय हजार।। होना भी तो चाहिए,मानवता से प्यार। देवलोक है तब धरा, जन्म लगे अवतार।। होना भी तो चाहिए,पाप पुण्य में भेद। पापी को होती सजा,करे नहीं वह खेद।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....