Poonam Mishra 28 May 2023 कविताएँ समाजिक जिंदगी को अलग तरीके से जिए जा रहे हैं 36525 0 Hindi :: हिंदी
जिंदगी के इस मोड़ पर न जाने क्यों ? अब अकेले ही अच्छा लगता है! बहुत कुछ किया औरों के हिसाब से ! अब अपने हिसाब से जीना मुझे अच्छा लगता है ! बहुत सी जिम्मेदारियों को पूरा किया मैंने ! अब मुझे अपनी जिम्मेदारी उठाने में अच्छा लगता है ! क्यों जिंदगी को मैं जी हूं! दूसरों के हिसाब से ! अब मैं अपने हिसाब से जीना चाहती हू देर से सोना देर से उठना कुछ लापरवाह सी जिंदगी अब मुझे अच्छा लगता है क्यों भविष्य की चिंता करु वर्तमान में खुश रहूं जो मिला है उसे जी भर कर जी लू यह सोच कर मुझे अच्छा लगता है