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बहाने बहुत हैं

MD SHAYEED ALAM 04 Jan 2026 कविताएँ समाजिक शायरी बहाने बहुत हैं 9287 1 5 Hindi :: हिंदी

बहाने बहुत हैं अपनी नाकामी छुपाने को, 
माचिस की एक तीली काफी है पूरा जहां  जलाने को, 
अपने अंदर की चिंगारी को बुझने मत दो यारो, 
उम्मीद की एक किरण ही काफी है फिर से खड़ा हो जाने को।।

Comments & Reviews

Nihal singh
Nihal singh बहुत अच्छी कविता है ।

4 months ago

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