ATHARV YADAV 30 Mar 2023 कविताएँ देश-प्रेम Google 101731 0 Hindi :: हिंदी
त्याग ,तपस्या,तपोभूमि का वासी पूछ रहा हूं मैं ,
हर-हर चुमी थी जिसने फांसी उसी देश का वासी पूछ रहा हूं मैं ,
डम डम वाले डमरू से कैलाशी पूछ रहा हूं मैं ,
मथुरा वृंदावन हरिद्वार और काशी पूछ रहा हूं मैं,
सारी दुनिया से आगे बढ़कर पूछ रहा हूं मैं ,
दहशत और गद्दारों की छाती पर चढ़कर पूछ रहा हूं मैं ,
इतिहासकार और सिंहासन से अड़कर पूछ रहा हूं ll
पूर्वजों की वीरता के कितने इतिहास पढ़ा डालें ,
सुन सुन कर आती हंसी इतनी उपवास पढ़ा डालें ,
मैंने भी इतिहासओ में बहुत तो के नाम सुने ,
कई राणा महाराणा और कितने तो चौहान सुने ,
सूरज की किरणें भी भारत से होकर जाती थी ,
सुनाएं यहां तक सारी दुनिया आर्यव्रत कहलाती थी ,
महान वीर मुनियों संतो से मेरे देश का नाम रहा ,
फिर भी मेरा भारत 12 सौ वर्ष गुलाम रहा ll
क्या चाणक्य की कूटनीति थोड़ी भी काम नहीं आई,
दिल्ली में पृथ्वीराज बड़ा दिल वाला था ,
मेवाड़ का महाराणा जो चलता था चेतक पर जिसका एक कुंटल का भाला था ,
रानी पद्मिनी जो इज्जत हेतु अग्नि में जल जाती थी ,
रानी कर्णावती जो दोनों हाथों से तलवार चलाती थी ,
रानी लक्ष्मी जो जंग लगी तलवार में धार लगाती थी ,
पर भारत मां का सीना तो उस दिन गर्भ से फूल गया ,
जब 18 वर्ष का खुदीराम चुमे फांसी को फांसी झूल गया ll
-वंदे मातरम
- "रोहित यादव"
_ धन्यवाद