कृपाण सा किरदार था, मोम बन गया हु ,
ख़ून की बात किया करता था आज मैं थक गया हू ,
थका क्या शायद में डर गया हू ,
सो(निंद) लू चाहे जितना पर निंद म� read more >>
शून्य होता जा रहा हूँ,
पता नहीं जिंदा हूँ या मरता जा रहा हूँ ,
सूरज की भाति रोज निकलता हू शाम को लौट आता हूँ ,
मौन होता जा रहा हूँ ,
शून्य ह� read more >>
मंजिलें जिद्दी है तो हम भी कहां कम है
समय कठिन है तो हमे भी सरल कहां पसंद है,
रास्ते टेढ़े है तो लक्ष्य कहां सीधा है,
मिल जाए जो दरिया तो � read more >>