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ATHARV YADAV

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@ rohit-yadav
, Uttar Pradesh

हिंदी साहित्य , लेखक ,कवि और कविताएं ......"ATHARV YADAV"

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कृपाण सा किरदार था, मोम बन गया हु , ख़ून की बात किया करता था आज मैं थक गया हू , थका क्या शायद में डर गया हू , सो(निंद) लू चाहे जितना पर निंद म� read more >>
शून्य होता जा रहा हूँ, पता नहीं जिंदा हूँ या मरता जा रहा हूँ , सूरज की भाति रोज निकलता हू शाम को लौट आता हूँ , मौन होता जा रहा हूँ , शून्य ह� read more >>
अपना ही अपने पर बाण छोड़ता है, अपना ही अपने को रोकता है, अपना ही अपने का संघार करता है , और अपना ही अपने के लिए कफन लेकर आखिरी विदाई का read more >>
मनुष्य बड़ा अभिलाषी है भूल जाता है की आपका ही तो दIसी है पाँचों उंगली का माप सामान नहीं मन हर इंसान बल बुद्धि विदवान नहीं परंतु कर तो सब read more >>
क्या सच म जतने प्यार ही आई हो न मुझे यही करने बर्बाद तोह नही आई हो न read more >>
थोड़ी सी तू मुझे मिल जाएं ऐ जिंदगी इतना ही बस चाहा है हर ख़्वाब मुक्कमल हो आंखों का इतना कब मैंने मांगा है.... read more >>
जलते हुए चिरागों को बुझाते हो क्यूं। दिल मेरा इस कदर यूं दुखाते हो क्यूं।। इश्क मे किस-किस मकाम से गुजरे। ये अफसाने यूं सबको सुनाते ह read more >>
वक्त हर वक्त आगे को चलता रहा दरिया सागर की ओर बहता रहा है सफर है अलौकिक चलती है सृष्टि दिन -रात का सिलसिला बदलता रहा है मगर एक तू है सद� read more >>
मैं तुम लोगों से इतना दूर हूँ तुम्हारी प्रेरणाओं से मेरी प्रेरणा इतनी भिन्न है कि जो तुम्हारे लिए विष है, मेरे लिए अन्न है। मेरी असंग read more >>
मंजिलें जिद्दी है तो हम भी कहां कम है समय कठिन है तो हमे भी सरल कहां पसंद है, रास्ते टेढ़े है तो लक्ष्य कहां सीधा है, मिल जाए जो दरिया तो � read more >>

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