ATHARV YADAV 20 Mar 2026 कविताएँ दुःखद 3871 0 Hindi :: हिंदी
कृपाण सा किरदार था, मोम बन गया हु , ख़ून की बात किया करता था आज मैं थक गया हू , थका क्या शायद में डर गया हू , सो(निंद) लू चाहे जितना पर निंद मे कुछ अर्चन सी हे , जिंदगी सुली पर लटकन सी हे l मारना तो रहा नहीं हे , कुछ करेंगे जो सबक बने, चाहे चमरी धमक उठे, यूंही थोड़ी नेस्तनाबूत होंगे, जंग में उतरे हे तो दो दो हाथ खूब होंगे , मरना तो हे ही न , कुछ करना तो हे ही न ll