ATHARV YADAV 01 Feb 2026 कविताएँ दुःखद #संघर्ष और शक्ति ,जीवन के सत्य, आत्म-चिंतन,हिंदी कविता 9613 0 Hindi :: हिंदी
शून्य होता जा रहा हूँ,
पता नहीं जिंदा हूँ या मरता जा रहा हूँ ,
सूरज की भाति रोज निकलता हू शाम को लौट आता हूँ ,
मौन होता जा रहा हूँ ,
शून्य होता जा रहा हूँ ।।
पहले मैं मस्त हूँ कुछ नहीं था हाथ में सब थे मेरे साथ में
पर अब मेरे हाथों में हथकड़ियाँ लग गई हैं
दबी है बात और मुस्कान छीन गई है
मैं निरस्त हो रहा हूँ, मैं अस्त हो रहा हूँ।।
चक्रव्यूह में फस गया हूँ सच में अब मैं थक गया हू,
जिंदगी अभिशेष है बची अभी दौड़ है ,
जीतना हारना तो तय जबभी होगा,
जो होना है वही होगा ।।
अब विराम होगा ,
अंत में मेरा नाम होगा
जी रहा हूँ या मरता जा रहा हूँ
मैं मस्त हो रहा हूँ मैं निरस्त हो रहा हूँ
मैं सशक्त हो रहा हूँ, मैं अस्त हो रहा हूँ।
~अथर्व यादव