Vikas Yadav 'UTSAH' 24 Aug 2023 कविताएँ देश-प्रेम ISRO CHANDRAYAN 3 HINDI KAVITA VIKAS YADAV RAKSHABANDHAN 66724 0 Hindi :: हिंदी
चंदा मामा की राखी
कितना प्यारा वंदन बन गया
ये रक्षाबंधन
जन्मों का बंधन बन गया २.....
जो कभी सपना था
लोरीयों में
आज वो चंदा मामा
अपना बन गया।
भेजी है मेरी भारत मां ने
राखी
अपना हाथ आगे बढ़ाना
ये रिश्ता तो जन्मों से था
चंद्रयान तो केवल बहाना था,
अब सब्र है उस पल का२...
ऐ मामा......
खुशी - खुशी तोहफा भेजवाना
हे मामा!
हे चंदा मामा!
बस इस राखी की लाज रख लेना
करोड़ों दिलों की आस रख लेना२...
खुशहाल रखना उस मां को
जिसने इसरो में लाल भेजा।
ये बंधन कभी ना टूटेगा
ये साथ कभी ना छूटेगा २...
बस थाम्हे रखना उस तिरंगे को
ये धरती क्या?
पूरा आसमान मेरी मां का होगा।
काव्य-
विकास यादव 'उत्साह'
हैदरगंज, गाजीपुर (उत्तर प्रदेश)