संदीप कुमार सिंह 04 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता सच्चाइ को दर्शाती हुईं आप के लिए दर्पण का काम करेगी. 14 0 Hindi :: हिंदी
मुक्तक दुनिया जा रही है एक अनजान सुख की तलाश में l दिमाग भर गया है आदत के बीजों से हताश में l जो सामने है उस से ऊब गया है मन देखता है दूर_ कल्पना की बेहद हसीन दुनिया चलती है आकाश में ll (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....