SHUBHAM PATHAK 05 Oct 2025 कविताएँ अन्य 13701 0 Hindi :: हिंदी
🌟 ज़िंदगी में रिस्क लेना सीखो 🌟 ज़िंदगी के सफ़र में डर से क्या जीना, हिम्मत से बढ़ो, मुक़द्दर है सीना। चोट लगे तो भी मुस्कुराना सीखो, ज़ंजीरों को तोड़ उड़ जाना सीखो। मंज़िल उसी की होती है जो चलता है, रास्तों में गिरकर भी फिर संभलता है। जो डर के साये में सिमटकर बैठा रहे, वो क्या जानें तूफ़ानों में कैसे रहता है। वक्त से पहले मौत नहीं आती किसी के द्वार, हिम्मत वालों का ही होता है संसार। जो जोखिम उठाए, वो नाम कमाए, डरपोक तो बस पछतावे में दिन गँवाए। आंधियों के आगे सीना तान देना, ख़्वाबों के लिए अपनी जान देना। राहें कठिन हों, फिर भी मत रुकना, सपनों को हकीकत में बदलना। ज़िंदगी का असली स्वाद है यही, जो डर मिटाए, हौसले दे सही। रिस्क लेने वाले ही लिखते हैं कहानी, बाकी रह जाते बस अपनी जुबानी। शुभम पाठक ✍️✍️✍️