Anilkumar Rathwa (Sameer) 17 Dec 2025 कविताएँ समाजिक "किस्मत का कारीगर" 8187 0 Hindi :: हिंदी
किस्मत कोई ताज नहीं जो बैठे-बैठे मिल जाए, ये तो वो जंग है जो सिर्फ़ लड़ने से ही जीती जाए। ख़यालों की उड़ान बहुतों ने भरी है, पर मंज़िल उसी ने पाई है जिसने ज़मीन भी नापी है। हर सुबह एक सवाल लेकर आती है, आज तुमने अपने सपने के लिए क्या क़ीमत चुकाई है? जो जवाब कर्म में देता है, वही आगे बढ़ता है, बाक़ी तो सोच में उलझ कर वहीं ठहर जाता है। मेहनत जब आदत बन जाती है, तो हालात भी झुकना सीख लेते हैं। हाथों में छाले हों तो शिकायत मत करना, यही निशान कल तुम्हारी पहचान बनते हैं। अंधेरों से डरकर जो रुक जाता है, वो रोशनी की कीमत कभी नहीं समझ पाता। जो जलता है, तपता है, खुद को गढ़ता है, वही अपनी किस्मत का कारीगर कहलाता है। याद रखना, वक़्त तालियाँ नहीं बजाता, वो सिर्फ़ कर्म की आवाज़ पहचानता है। सोचने वाले बहुत मिलेंगे इस राह पर, पर इतिहास सिर्फ़ चलने वालों को जानता है। किस्मत बदलनी है तो आज ही उठना होगा, ख़ुद से किया हर वादा पूरा करना होगा। क्योंकि तक़दीर कभी बहाने नहीं गिनती, वो सिर्फ़ मेहनत की सच्चाई सुनती है।