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खामोस नजर से क्या कहु

Rupesh Singh Lostom 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत खामोस नजर से क्या कहु 42441 0 Hindi :: हिंदी

 
खामोस नजर से क्या कहु
बिन बोले ही सब 
कुछ कहती हैं 
न राज छुपाती सिने में 
न रूप दिखती दर्पण में
खामोस नजर से क्या कहु 
कहने को कई बात है 
होठो पे थोड़ी प्यास है 
उमड़ रहे मन में
एक साथ कई जज्बात 
बोलने को तो बोल दू 
खामोस नजर से क्या कहु 
तेरी जिन्दा बुझती सासें 
कुछ बिखरी एह्शासें
जो बूत बन के बैठी हैं 
इस निर्लज निठुर से 
खामोस नजर से क्या कहु  

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