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खेल का दीप जलाओ

Kishor Kumar Bhardwaj 11 Oct 2025 कविताएँ अन्य खेल 9793 0 Hindi :: हिंदी

कविता: 🏅 “खेल का दीप जलाओ” 🏆

मैदान बुला रहा है तुमको, आओ खेल दिखाओ,
दिल में जोश, आँखों में सपना - आगे कदम बढ़ाओ।
पसीने की हर बूँद यहाँ, मेहनत का गहना बन जाए,
देश का नाम ऊँचा करके, इतिहास नया रच जाए।

हारो अगर तो डरना मत, फिर कोशिश दोहराना,
हर ठोकर सिखलाती है - मंज़िल तक पहुँचना आना।
जीत नहीं बस इनाम यहाँ, सीख ही सच्ची बात,
जो गिरकर फिर उठ जाता है, वही विजेता कहलाता है।

नारी हो या नर खिलाड़ी, सबमें शक्ति समान,
हौसले से बड़ी नहीं कोई दीवार, कोई आसमान।
दिल में भरोसा, आँखों में चमक, यही है असली मान,
चलो बढ़ो उस राह पे तुम, जहाँ जीत करे सम्मान। 

जब सीटी बजे, जब झंडा लहराए, दिल में उमंग जगाओ,
माँ भारती के चरणों में, जीत का फूल चढ़ाओ।
तेरे पसीने से महके भारत, तुझसे बढ़े सम्मान,
चल खिलाड़ी, खेल का दीपक जला दे - जीवन को उत्साह और उमंग उत्सव बना दे! 

✍️ के.भारद्वाज..🎖️

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