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मैं विपक्ष हूं

Vaishnavi 09 Nov 2025 कविताएँ राजनितिक #politics #country #opposition #parliament #patriotism #change #india #bharat #election #change #बदलाव #राजनीति #संसद #देश #देशप्रेम #देशभक्ति #विपक्ष #युवा #youth 13828 0 Hindi :: हिंदी

*मैं विपक्ष हूं* 

अडिग अमिट और खड़ा अचल;
हूं ललकार रहा सत्ता को बन अंधकार की लौ अविचल!
सत्ता के शासन से ज्यादा संसद की भीतों में मैं हूं बस हुआ;
गूंज रही मेरी वाणी बन इतिहास की न्याय ध्वजा!

 *हां मैं विपक्ष हूं* 

चकाचौंध से परे बसा हूं संविधान की आभा में,
सत्ता को थामा, रोका, समझाया – हूं सत्याग्रह की छाया मैं।
सन् 1975 मैंने ही घुटन के बीच देश को सांसें दी- 
बंद सलाखों के पीछे से जेपी के वो पत्र की स्याही हूं मैं,
कारागृहों में दब गई चीखों का संविधान - संवेदक साक्षी हूं मैं!

 *हां मैं विपक्ष हूं* 

झांक रहा में लोकतंत्र के स्वर्णिम कल की वर्णिका से,
छलका था तब मैं ही अटल की कविता की धारा से,
जय जवान, जय किसान की नींव है मुझसे ही बनी हुई;
सत्ता को ललकारने वाली जनता की आवाज में हूं छुपा मैं ही!

 *हां मैं विपक्ष हूं* 

मैंने ही निजीकरण को दी चुनौती,
औद्योगिकरण की आंधी में अन्नदाताओं के अधिकारों की अभ्यर्थना की अनेक बार!
सूचना के अधिकार के युद्ध का हूं सेनापति में ही; जनता के स्वर की प्रबल धार!

 *मैं विपक्ष हूं,* 

भ्रष्टाचार के हवन कुंड का भक्षक,
लोकपाल की कलम से उकेरा गया अक्षर,
काले धन का श्वेत शत्रु,
घोटालों पे संसद में गूंज उठे हर परिप्रश्न का साधक हूं मैं;
जनहित में सत्ताधारी सिंहासन पर आच्छादित स्वर मैं ही!
परंतु अब कहां गई वो आभा मेरी?
कहां गई हिम्मत अभ्यर्थना की मेरी?
क्यों हूं मैं चुप छाप पड़ा जब देश मुझे पुकार रहा?
क्यों गूंज नहीं रही मेरी खनक संसद के कानों में?
क्यों सन्नाटा सा है सता के गलियारों में?

उठो देश के वीर युवाओं तुम्हीं मुझे जगाओगे।
खुद को कर के सत्ता के अधीन तुम जीत नहीं तुम पाओगे?
करो सवाल, उठाओ प्रश्न यही लोकतंत्र की शान है।
मैं लोकतंत्र का संरक्षक, यही मेरी पहचान है।।

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