हाथों में छाले, उदर में भूख ;
नेत्रों में निद्रा, नीर को आतुर कंठ चुका है सूख,
मजदूरी किसी का शौक है क्या?
घर का राशन, बच्चों की शिक्षा;
प read more >>
हाथों में छाले, उदर में भूख ;
नेत्रों में निद्रा, नीर को आतुर कंठ चुका है सूख,
मजदूरी किसी का शौक है क्या?
घर का राशन, बच्चों की शिक्षा;
प read more >>
अमृत कल हो चुका शुरू अब बारी नई हवाओं की है,
पूर्वजों से बनी बुनियाद अब बारी हम युवाओं की है,
यह सब है यहां बैठे हर युवा की भुजाओं पर,
तुम read more >>