Vaishnavi 17 Nov 2025 कविताएँ राजनितिक #yuva #india #politics #parliament #election #youth #voice #revolution #change #क्रांति #बदलाव #राजनीति #चुनाव #देशभक्ति #भारत #स्वतंत्रता #संसद 14492 0 Hindi :: हिंदी
अमृत कल हो चुका शुरू अब बारी नई हवाओं की है, पूर्वजों से बनी बुनियाद अब बारी हम युवाओं की है, यह सब है यहां बैठे हर युवा की भुजाओं पर, तुम जिम्मेदारी कहो या मजबूरी , विश्व का सबसे वृहत लोकतंत्र रहा पुकार तुम्हें, तुम प्राण बनो या कमजोरी। परंतु क्या हमारे देश का युवा मुस्तैद है इस भूमिका में आने को? क्या वह है तत्पर लोकतंत्र में आपने पग जमाने को? अब क्यों खौलता युवा का रक्त नहीं? क्यों रुधिर में परिवर्तन की हिलोर नहीं ? क्यों विचारों में क्रांति का शोर नहीं? तू क्यों शिक्षा और अवसर की मांग में एक जुट नहीं? क्यों तेरी ऊर्जा में समाज निर्माण की चमक नहीं? क्यों तेरा मतपत्र अनमोल होते हुए भी है बेकार पडा ! उठो युवा, आवाह्न करो तुम राष्ट्र प्रेम का ध्यान करो तुम, उपासक बनो तुम लोकतंत्र के, देश बने आराध्य तुम्हारा। तकदीर हो, तस्वीर हो शहतीर हो तुम देश के, शमशीर है, तुणीर में चलने को आतुर तीर है- हर कदम तुम्हारा। आओ करें हम नवजागरण, सोचो जरा, कितना अलौकिक होगा प्रतिबिंब इस देश का! जब युवाओं से सजा होगा रण ।।।।
Geogrpher at Indraprastha college for women, University of Delhi....