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मजदूर

Vaishnavi 09 Dec 2025 कविताएँ समाजिक #मजदूरी #समाज #सेवा #संघर्ष #मजदूर #क्रांति #जीवन #दुख #सरकार #प्रेम #राजनीति #labour #pain #मजबूरी #माया #life #struggles 9166 0 Hindi :: हिंदी

हाथों में छाले, उदर में भूख ;
नेत्रों में निद्रा, नीर को आतुर कंठ चुका है सूख,

मजदूरी किसी का शौक है क्या?

घर का राशन, बच्चों की शिक्षा;
पिता की बीमारी, और पत्नी की वो अधूरी इच्छा,

मजदूरी किसी का शौक है क्या?

भावों की शून्यता, टूटे से सपने;
विश्राम की हूक, कुछ तो अरमान भी रहे होंगे अपने,

मजदूरी किसी का शौक है क्या?

मालिक की गाली, सुलगती सी काया;
मृत्यु का ख़ौफ़, जीवन की उलझी सी माया,

मजदूरी किसी का शौक है क्या?

तपती सी धूप, अपनों की रंजिश;
ग्रहों का दोष?, किस्मत की साज़िश?

मजदूरी किसी का शौक है क्या??

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