MUSARRAT ALI 06 Jan 2026 कविताएँ समाजिक Khamosh_Alfaz 8991 1 5 Hindi :: हिंदी
नभ के राही तु सुन मुझको ले चल उस पार जहाँ उड़ के तु जाता है लेने प्यार दुलार । नभ ही है वो घर तेरा नभ ही तेरी जान नभ में ही विचरण करें नभ से तेरी मान । पवन चाल में चाल चले तु जब तुफां आता हैं दिल को कर कठोर ही चलता मन में ना घबराता है । होत तेज बारिश हो या हो पुस की रात नहीं छोड़ता चूंजों को भी ले उड़ चलता साथ । तु देता है संदेश ख़ुदा का तुझको सब है प्यारे सिमट जाए ये धरती अम्बर इतने पंख फैला रे । ........... अली मुसर्रत मिर्ज़ापुरी
4 months ago