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पानी पर खिलता कमल हो तुम

शरद भूषण मोंगरा 07 May 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत पानी पर खिलता कमल हो तुम 3571 0 Hindi :: हिंदी

"पानी पर खिलता कमल हो तुम"

पानी पर खिलता कमल हो तुम
कुदरत की लिखी गज़ल हो तुम
या हरी भरी प्रकृति में 
योवन का ताज महल हो तुम
या नीले नीले  नीर में चमचम 
करती मछली चहल हो तुम
अल्हड़ तन की मधुशाला हो
या पल जल में  कोई कहल हो तुम
अरे शांत शांत से पानी में  
कोई द्वन्द भरी हलचल हो तुम
है जल थल जिससे महक रहा
ऐसा  मालिक का फ़ज़ल हो तुम  ।

शरदभूषण मोंगरा

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