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#राजिम_कुंभ_कल्प

Kishor Kumar Bhardwaj 03 Mar 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत 16323 0 Hindi :: हिंदी

नील गगन के नीचे, जलधारा के बीच,
एक नाव चली, बहती रीतम - रीत।

नाव की देहरी पर बैठी कोई,
मानो स्वप्नों से आई जलपरी।

नयनों में गहराई, लहरों-सी मुस्कान,
उसे छूने को आतुर,शीतल पवन।

सुनहरी लटों में सूरज की छाया,
मुक्त सा दिखता था उसका काया।

क्या थी हकीकत, क्या थी कहानी,
लहरों ने दी एक नई निशानी।

नाव चली पर जलपरी खो गई,
यादों की लहरों में छवि रह गई।

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