Santosh kumar koli ' अकेला' 09 Mar 2025 कविताएँ समाजिक सीधी टक्कर 24369 0 Hindi :: हिंदी
सत पथ पर रत, टक्कर जीवन उद्देश्य से। स्व संजात परदा उठे, क्षमता रहस्य से। सलिल में अनल लगा दे, टक्कर चुग़ली तलब से। स्वार्थ चुग्गा चुगा, चढ़ा गिरा दे नभ से। विश्वासघाती के आगे, फीकी लगती है शक्कर। लो इनसे, सीधी टक्कर। खुद हाथ रखता अंँगारा, टक्कर गूढ़ गुस्से से। सोओ संघर्ष सेज, दूर शय्या शस्य से। ज़ंग से जड़ बने, टक्कर आवृत आलस से। मेहनत है यशदीकरण, चमको जग निज यश से। दगा नहीं सगा, बनों मत मकर मगर। लो इनसे, सीधी टक्कर। जीने दे न मरने दे, लो नकारात्मक सोच से। सुखद सोचो, सुखद रहो, बचो सोच की मोच से। दुर्गुणों से लो टक्कर, चुन -चुन, गिन- गिन। खुद की टक्कर खुद से होगी, कहलाओगे तुम जिन। शम शमा जलाओ, क्षिति पर क्षत्र नहीं अमर। लो इनसे, सीधी टक्कर। लो इनसे, सीधी टक्कर।