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“रोज़ का प्रयास, कल की सफलता”

Anilkumar Rathwa (Sameer) 02 Dec 2025 कविताएँ समाजिक “रोज़ का प्रयास, कल की सफलता” 11798 0 Hindi :: हिंदी

बूंद-बूंद से जब घड़ा भर सकता है,
तो रोज़ के छोटे प्रयास क्यों नहीं रंग लाएँगे?
थोड़ा-थोड़ा पढ़ते रहो,
एक दिन यही छोटी आदत
तुम्हें बड़ी कामयाबी दिलाएगी।

सफलता किसी एक दिन नहीं मिलती,
वो तो रोज़ के संघर्षों का जोड़ होती है।
आज एक पन्ना पढ़ोगे,
कल एक नया पाठ समझोगे,
और धीरे-धीरे यही पन्ने
तुम्हें मंज़िल तक पहुँचा देंगे।

घबराओ मत,
धीमी चाल भी मंज़िल तक पहुँचाती है।
बस रुकना मत,
क्योंकि रोज़ की छोटी मेहनत
एक दिन बड़ी पहचान बनाती है।

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