मोती लाल साहु 29 Jun 2023 शायरी समाजिक #चाह की चाहत में डूबे ऐसे- गुज़र गई उम्र सारी #हाथ आया ना कोई रतन यारों- चाह ले गई व़क्त सारी #चाह के अमीर हैं हम- चाह ना पूरी हुई कभी? 28743 0 Hindi :: हिंदी
चाह की चाहत- में डुबे ऐसे अब यह भी और हर वह की चाह में,, गुज़र गई उम्र सारी..!!? हाथ आया- ना कोई रतन यारों, चाह ले गई व़क्त सारी,, चाह के अमीर हैं हम, चाह ना पूरी हुई कभी....!!!!? -मोती