Kishor Kumar Bhardwaj 13 Jan 2026 कविताएँ अन्य पतझड़ 9778 0 Hindi :: हिंदी
#पतझड़ ये पत्तों की टहनियों से जुदा होने का मौसम है। तन्हा छोड़ उन्हें हवाओं में बह जाने का मौसम है। ये पतझड़ है। गम की नम आंखों से झांकती टहनियों के वीराने का मौसम है। जो शाख से टूटकर जा चुके अब उन्हें भुलाने का मौसम है। ये पतझड़ है। गर्म हवाओं से दूर सर्द हवाओं का मौसम है। बहार ए वफ़ा की न फिक्र कर ये उनके रूठ जाने का मौसम है। ये पतझड़ है वो जो बंधन तोड़ कर जा चुके उनके मिट जाने का मौसम है। बहारो से कोंपले फूटेगी शाख पर, सोचकर जश्न मनाने का मौसम है। जाने भी दो ये पतझड़ है।