जब मैं छोटा था तब मेरी मां, मुझे नींद नहीं आती, तब मुझे यह लोरी, गाकर सुनाती थी_ चंदा मामा दूर के
पूरी पकावे भीड़ के. अपने खाए थाली में,
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अपने से जबलगाओ हो जाता है तब उसकी हर एक बात भी अच्छी लगती है वह कितना भी दर्द दे दे फिर भी उन्हें छोड़कर जाने को दिल नहीं करता जब किसी ऐस� read more >>
हमारे समाज में आए दिन नई नई घटनाएं देखने को मिल रही है गलती किसी की हो पर सजा एक नारी को मिलती है चाहे वह ससुराल हो या मायका हो या समाज हो
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मिस्टर बंडू लाल-(
कटघरे में खड़े हैं) चंपू जी उनका वकील है,( सामने जज महोदय भोंदू दास) केस चल रही है चीनी चोरी की_( हमारे खटपटिया) थाने का द read more >>
चित्रगुप्त की डायरी में, एक इंसान का जिक्र है, दरबार लगा हुआ है, सामने ही धर्मराज, सिंहासन पर बैठे हुए हैं, कुछ लोगों की कतार लगे हुए हैं, � read more >>
यह घटना लगभग 30 वर्ष पहले की है, मेरी दादी मां सुनाया करती थी _ बिहार के पंचानवे नदियों में से, एक नदी सकरी भी है, जिन की महिमा यह है कि_ गर्म read more >>