जब संजीव को कार्यालय सहायक की नौकरी मिली, तब उसे लगने लगा कि शहर में अब एक अदद घर की मुराद पूरी हो सकती है। वह घर बनाने के लिए जमीन खरीदने read more >>
कोई लौटा दे वो दिन ,
जिसमें खेला था मेरा बचपन।।
चू -चू कर चिड़िया आती थी,
बिखरे दाने चुन -चुन आंगन से खाती थी।
मैं दौड़ कर उन्हें पकड़ा कर read more >>
1) वक्त - वक्त की बात हैं ज़नाब !
जिनकी नजरें अक्सर ढूंढा करती थी मुझको,
अब वो नजरें फेर लिया करती हैं ।
2) आजकल आतंक की दीवारें ढाह रही हैं स� read more >>