आता हूँ तेरे द्वारे ,एक आस निहारे,
शरण में ले, ले अपने शरणागत प्यारे,
कर्म, अकर्म का ज्ञान नहीं,
उचित, अनुचित का ध्यान नहीं,
छल, कपट का पहच read more >>
अगर मैं तुमसे कहता हूं, कि तुम जाग कर भी नहीं जा सकते, तुम आधे हो, जो कभी पूरे नहीं हुए तुम ठीक प्रकार से, सोकर नहीं उठते, तुम्हारा मन अभी भ� read more >>
ऩजर को लगी ऩजर, दिखाई देते पर दोष।
खुद को तो मानता, गुण-रत्न का कोष।
दूसरों की उघाड़कर, खुद की ढकने का होश।
दूर की जलती सूझे, घर में जले तो read more >>
जो हर मोड़ पर रुक के मेरा इंतजार करते थे
वह आज एक नजर देख कर आगे बढ़े गए
रोना तो मेरी किस्मत में था
बस आंसू तब झलक गए
जब तब धूल डा ली साथी read more >>