मुखड़ा- एकही हा बात के भाई बावे हमके खेद जी,
प्यार में काहे लोगवा करेला भेद जी,
केहू चाहे दिल ता केहू चाहे छेद जी,
प्यार में काहे लोगवा कर� read more >>
काठ की नाव तू बढ़ता चल,
दो चार पथिक ले अपने संग,
जिसका न अपना मंजिल पथ,
फैला सागर का गहरा जल
बने रुकावट लहरें हर पल |
काठ की नाव तू बढ़ता च read more >>
काठ की नाव तू बढ़ता चल,
दो चार पथिक ले अपने संग,
जिसका न अपना मंजिल पथ,
फैला सागर का गहरा जल
बने रुकावट लहरें हर पल |
काठ की नाव तू बढ़ता च read more >>
जीवन जीने का यदि हो उमंग,
दु:ख भी भर देता जीवन में रंग,
है काम कौन कर सके न नर
आलस्य त्याग चल पड़े डगर,
सांसें भर कर हिम्मत कस कर,
पथ पर चल क read more >>
महंगाई का अजगर
रसोई को खा रहा है !
रसोई की थाली से स्वाद
रफ़्ता - रफ़्ता गायब हुआ जा रहा है !
महंगाई का अजगर
रसोई को खा रहा है !
पहले कोरो� read more >>
कांटों में पला बढ़ा जीवन
संग पत्ते बीच हरे-भरे,
कली से खिल कर फूल बना,
एक चुभ जाता
जो छूता मुझे,
एक रंग भरा
संग मेरे रंगों के,
वे सरल कठो� read more >>