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हर तमन्ना खाक हुई, आने की उम्मीद भी नही ।. क्या गुनाह किया जो तकदीर भी मुझसे रूठी ॥ राह देख कर थक गई आंखे रात ढली शमा भी बुझ गई ' लौट आने क� read more >>
इस विशाल अम्बर पर कैसा गहन तिमिर छाया है भारतवर्ष सरोज , सिंह क्यों इतना कुम्हलाया है नए सिला लो वस्त्र पुराने आज खोलने आया सुनो अगर � read more >>
क्यो नफ़रत की आग लगा बैठे हो, खुद को ही भट्ठी में जला बैठो हो, अहिंसा का पाठ क्यो भूल गए, हिंसा दिल में क्यो लिए बैठो हो। read more >>
चाहतों के शहर में नफरतों का दौर देखा,जो बनते थे मुंह मीठे पीछे से वार करते देखा। read more >>
तेरे बिन जिन्दगी,मैं गुजार तो लू खाली है जिन्दगी,पहले मैं उसे सवार तो लू नही कोई मलाल जिन्दगी मे बाकी बाकी है कुछ जिन्दगी,मैं उसे गुजा� read more >>
//...हाल -ए - दिल...// ये दिल , किस हाल में है... तुम कैसे , जान पाओगे ? हाल ... क्या है इसका ? ये तो , मुझे भी खबर नहीं...! चिन्ता नेताम " मन " डो read more >>
सर्दी के दिनों में ,मैं ओस चाहता हूँ, हर नव युवक में, इक नया जोश चाहता हूँ | जो लड़ जाये हर तुफानों से , ऐसा सीना ठोस चाहता हूँ | read more >>
उदास चेहऱ्याच्या चेहऱ्यासह जीवन, मी तुला बघून मी कंटाळलो आहे, आणि तुझा ओढलेला झगा, आणि तुझा झपाटलेला वेग, आणि तुझी जबरदस्ती आनंददायी आ read more >>
तेरे खावों ख्यालों की दुनियाँ हूँ मैं शाम है तू,उजालों की दुनियाँ हूँ मैं जबाब मयस्सर हों तो आना कभी अनगिनत सवालों की दुनियाँ हूँ मै� read more >>
यह मेरी रचना है, मुझे आप सबके साथ, शेयर करने में खुशी हो रही है, सबसे पहले मैं अपने पाठकों को, लाख-लाख धन्यवाद देता हूं,( हमारी महान संस्कृ� read more >>
अरा रारा ऊई,,,अरा रारा ऊई,,,,, (1) नदिया के तिर म बैठे कोकड़ा संगी, आऊ मछरी बीन बीन के खाय हो। कोकड़ा के पाछु म काटा गढ़गे, आऊ कोकड़ा कोय read more >>
छोड़ छोड़, तू छोड़ चुप्पी। समाज को, ग़लत दिशा दे रही। एक अंतहीन, काली निशा दे रही। समाज को, ग़लत संदेश सुना रहा। चुप्पी को व्यक्ति, अपने हिसा� read more >>
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