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ऐ गुलाब तू क्यों अब इन पन्नों में डरा सहमा छुपा हुआ है, वो भी एक जमाना था जब तू मेरी प्रेरणा हुआ करता था।। ✍️प्रदीप सिंह ग्वल्या read more >>
जिंदगी जीने की मेरी ख्वाहिश थी, अपने छोड़कर गैरों पर चाहत थी| गैरों के चक्कर में अपनों को भूला बैठे, जब अपनों ने दिया सहारा तब गैर रूला read more >>
अक्सर वह यह कहा करते हैं, के उनको इक पल की भी फुर्सत नहीं पर जाने क्यों हमें यह लगता है के हमसे उनको कोई मतलब ही नहीं। read more >>
मेहमान वनके आए थे कभी अब याद वनके ही रह गये हो, मिलों दूर के ओ रहने वाले तुम अब ख्वाब वनके ही रह गये हो। read more >>
मैं खुले गगन का पंछी बनकर आधार धरूँगा हिंदी में। मै रजत रश्मि का सूरज बनकर चमक उठूंगा हिंदी में। जीवन की जो आशा हैं उस आशा में परिभा� read more >>
उठाना गिरना प्राकृतिक स्वभाव है जैसे सुबह ओस गिरती है दोपहर में धूप गिरती है शाम को छांव गिरती है इस तरह जीवन में गिरने उठने का read more >>
एक बार स्वर्ग के देवता धरती पर विचरण करने आए|उन्हें आशा थी कि धरती के निवासी उनका विपुल स्वागत करेंगे ।उन दिनों खेतों में अनाज के पौधे � read more >>
क्या कभी आपने ये सोचा कि असली में इस द्वाराहाट ने श्री कृष्ण की द्वारिका बननी थी, लेकिन बनते - बनते रह गया ऐसा क्या होगा इस द्वाराहाट मे read more >>
मेरी मांग विधाता से हे विधाता आज तुझसे खिल चुकी मेरी भावना। आज तुझसे कह रहा हूं मांगा मैंने कामना। मुझको ये वरदान दे दो सादगी का मान read more >>
अपनी ऊर्जा अपनी खुशी में खर्च करो क्योंकि खुशी से ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है अपनी सभी समस्याओं से स्वंय निपटो जितना अधिक समस� read more >>
एक काम कर के जाना जी, जग में जीत के जाना जी, ख़ुद में ख़ुदा को जान के जाना जी ख़ुद को जान के जाना जी....!!!! -मोती read more >>
क्यों नाराज़ रहते हो क्यों नहीं कुछ कहते हो..... हमें भी दर्द देते क्यों खुद भी दर्द सहते हो....... तुम्हें क्या पता जब महीनों तुमसे बात नही read more >>
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