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गुलाब

Pradeep singh " gwalya " 23 Feb 2024 शायरी प्यार-महोब्बत Psdrishti.blogspot.com 27173 0 Hindi :: हिंदी

ऐ गुलाब तू क्यों अब इन पन्नों में डरा सहमा छुपा हुआ है, 
वो भी एक जमाना था जब तू मेरी प्रेरणा हुआ करता था।। 

       ✍️प्रदीप सिंह ग्वल्या

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