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मक़सद न हो कोई सफर-ए जिंदगी परख बिना वीरानों में
"मक़सद न हो- कोई सफ़र यूंहीं, कट जाए वीरानों में!" "मक़सद- बिना यह ज़िंदगी, यूंहीं कट जाए वीरानों में!" "यह रत्तन- अनमोल मानव तन, कहीं ख�
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विश्वास करो-भगवान ने किस मिट्टी से इंसान को बनाया
भगवान ने किस मिट्टी से इंसान को बनाया है । जिस तरह मिट्टी एक है, नाम अलग अलग है।। और उसी नाम से मिट्टी की पहचान होती है। उसी तरह इंसान भी
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मां-सामने गुस्से से डांटती डपटती है
सामने गुस्से से, डांटती, डपटती है। सोए हुए का धीरे से आ, माथा चूमती है। सामने निठल्ला, निकम्मा, कामचोर कहती है। बाहर मेरी बड़ाई करते, क
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अलविदा अलविदा अलविदा अलविदा-मेरे जाने का ग़म ना करना दोस्तों हंसते हंसते दे दो विदाई मुझे
मेरे जाने का ग़म ना करना दोस्तों हंसते हंसते दे दो विदाई मुझे याद हमेशा तुम आओगे भुले से भुलाओगे कहती मेरी परछाई मुझे अलविदा अलविदा �
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मंजिल-भूल के अपने दर्दों गम को मैं भी उडना चाहूँ
भूल के अपने दर्दों-गम को मैं भी उडना चाहूँ। हे लाखों उम्मीदें जिस दिल में मैं भी उससे जुडना चाहूँ। लगते हे कितने प्यारे ये आसमान-तार�
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काटे कटी न रात अब-रहूं बड़ा बेचैन जब से देखा हूं उसे वही बसी है नैन
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" काटे कटी न रात अब,रहूं बड़ा बेचैन। जब से देखा हूं उसे,वही बसी है नैन।। काटे कटी न रात अब,रहत
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तेरी क्या औकात है-सरा हुआ है अक्ल अब तक भी पीछे रहे करते खाली नक्ल
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" तेरी क्या औकात है,सरा हुआ है अक्ल। अब तक भी पीछे रहे,करते खाली नक्ल।। तेरी क्या औकात है,आए �
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जीना है तो सीख ले-जीने के सब ढंग अनुभव की जब दीप हो रहे प्रगति तब संग
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जीना है तो सीख ले,जीने के सब ढंग। अनुभव की जब दीप हो,रहे प्रगति तब संग।। जीना है तो सीख ले,जी
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नारी तेरा संग-सुख दुख को हम बांट कर पिएं नित्य मकरंद
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" नारी तेरा संग हो,फिर तो है आनंद। सुख दुख को हम बांट कर, पिएं नित्य मकरंद।। नारी तेरा संग हो,�
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समझो जीवन अर्थ को- हमें मिला वरदान जगत सजा संगीत से
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" समझो जीवन अर्थ को,हमें मिला वरदान। जगत सजा संगीत से,बनिए सदा सुजान।। समझो जीवन अर्थ को,रहे
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औजार भी है आवश्यक जीवन के लिए- और प्यार भी है आवश्यक जीवन के लिए
औजार भी है आवश्यक जीवन के लिए, और प्यार भी है आवश्यक जीवन के लिए। दुनिया में लाखों दोस्त भी हैं बनते, और लाखों दुश्मन भी हैं बनते। कभी_�
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जिंदगी ने डराया है तो उस डर को तोड़ना पड़ेगा -जो काम मिला है तुझे
जिंदगी ने डराया है तो उस डर को तोड़ना पड़ेगा । जो काम मिला है तुझे उसे पूरा तो करना पड़ेगा । चार दीवारों में जो यह अंधेरा है उसे रोशन �
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