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धीरे धीरे एक दिन- होगा बम विस्फोट बढ़ता यहां अधर्म से अच्छों में भी खोट
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" धीरे धीरे एक दिन,होगा बम विस्फोट। बढ़ता यहां अधर्म से,अच्छों में भी खोट।। धीरे धीरे एक दि�
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अपने मन की बात से-जीतें यह संसार गौरव बन कर देश का सबको दें अधिकार
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अपने मन की बात से,जीतें यह संसार। गौरव बन कर देश का,सबको दें अधिकार।। अपने मन की बात को,नही�
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एक भरोसा राम का-जो रहते हैं साथ हर विपदा से ले बचा सिर पर रख वो हाथ
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" एक भरोसा राम का,जो रहते हैं साथ। हर विपदा से ले बचा,सिर पर रख वो हाथ।। एक भरोसा राम का,जिससे
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ऐसी कैसी जिन्दगी-रहती है नाराज दूर ज्ञान से यह रहे गलत करे हर काज
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" ऐसी कैसी जिन्दगी,रहती है नाराज। दूर ज्ञान से यह रहे,गलत करे हर काज।। ऐसी कैसी जिन्दगी,रहता
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हँसी और मुस्कान से-करिए नित आदाब पाएं दुआ असीम तब
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" हँसी और मुस्कान से,करिए नित आदाब। पाएं दुआ असीम तब,रहे शक्ल पर आब। औरों को भी कर सरस,लिए ह�
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हँसी और मुस्कान-रहे जिसका गर साथी
#विधा:_रोला छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" हँसी और मुस्कान,रहे जिसका गर साथी। भय रहता है दूर,मिले सदगुरु की थाथी।। पाएं तब सब ज्ञान,बन�
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आशिक मेरे हैं सभी बनकर अदभुत सोम-हँसी और मुस्कान से खिल जाता है रोम
#विधा:_कुंडलिया छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" आशिक मेरे हैं सभी,बनकर अदभुत सोम। हँसी और मुस्कान से,खिल जाता है रोम।। खिल जाता है रोम,�
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हँसी और मुस्कान से-खिल जाता है रोम
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" हँसी और मुस्कान से,घायल करती नाज। दीवाना मैं जो बना,और लुटा दूं राज।। हँसी और मुस्कान से,ख�
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बेशक हुआ इस हुस्न पर दीदार आपका -चाहत की हमारी वह तलब गार हो गए
बेशक हुआ इस हुस्न पर दीदार आपका चाहत की हमारी वह तलब गार हो गए।। जीना था जिन्हें बिन नाम मोहब्बत के वो खुद्दार भी इश्क के बीमार हो गए।।
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ज़ख्म गहरा है सब्र से काम लेना है-ज़माने को अपनी चाहत में ढाल लेना है
ज़ख्म गहरा है सब्र से काम लेना है। ज़माने को अपनी चाहत में ढाल लेना है।। इंतहा होगा हमारे इश्क का आखिर कब तक। जुंवा को बंद रखो आंखों से
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यह छोटा नागपुर खनिज संपदा से भरपूर-आंचरा में है समृद्ध झारखंड
यह छोटा नागपुर- खनिज संपदा से, भरल झारखंड है आंचरा में ,, कल-कल- नदी बहेला पहाड़े झरे, झरना झारखंड कर आंचरा में,, बोली हमर- आऊ-जाऊ सबे रह�
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प्रेरक जीवनगाथा-रानी दुर्गावती की वीरगाथा
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *प्रेरक जीवनगाथा* 💐*रानी दुर्गावती की वीरगाथा*💐 भारत की हर बेटी कहे मुझे दुर्गावती बनना है 👌प्रस्तुतकर्ता-स�
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