(मुक्तक छंद)
कभी हालात ने साथ नहीं दिया था।
कभी अपना ही हम से रूठ गया था।
त्याग की राहों मैं सतत चलता रहा_
तब जा के कहीं समर्थन मिल रहा था read more >>
दिल की शाख पे बैठा कोई परिंदा,
हर घड़ी हर पल प्यार की कूँक लगाए।
उड़ जा तू यहाँ से ,मत अपना बसेरा बना,
फिर ना जाने कौन मुहब्बत की हूक जगा� read more >>
तू मेरी नजरों से दूर मत जाना ,
चाहे जो कुछ कहे उल्टा _ सीधा ज़माना ,
मैंने तुझे टूट _ टूट कर चाहा है पगली__
मैंने तुझे सदियों से अपना ही माना read more >>