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(मुक्तक छंद) आईने की तुझे जरुरत नहीं तुम खुद एक आइना हो। शीशे जैसा चमकता तेरा बदन तुम एक मृदु हसीना हो। देखने के बाद लोग खुदबखुद चार्ज � read more >>
स्त्रियां बाथरूम मे जाकर कपड़े भिगोती है: बच्चो और पति की शर्ट की कॉलर घिसती है; बाथरूम का फर्श धोती है ताकि चिकना न रहे: फिर बाल्टी औ read more >>
पता नही तुम कौन हो मगर बना लिया हमे अपना दिख रहा है हमे वो जो देखा था हमने सपना बोलते हो ऐसा की सुनती है पूरी सभा हम जान गए है तुम्हे सुन� read more >>
बचपन में मां ने खूब लाड किया बड़े होते ही सैनिक बना दिया सोचा नहीं था ये दिन आ जाएगा चलो आसू बहाकर ही यह ढल जायेगा मगर वे यादें मैं कैसे read more >>
अपनी जान हमेशा जोखिम में डालता है दूसरो के लिए हमेशा खुद मर जाता है मरने के बाद भी मरता नहीं है वो अंधेरे में भी रोशनी कर देता है वो हर � read more >>
कहानी- परीक्षा शब्द रचना- जितेन्द्र शर्मा चौधरी वीरभान सिंह ने भोजन किया व हाथ धोने के लिए नल के पास बनी चौकी पर पहुंचे। उनकी पत्नी स� read more >>
अदाओं की रौशनी से जगमगाती है रात, इश्क की राहों पर गुनगुनाती है बात। दिल के अरमानों को छूने वाली हर साज़, गजल की ढंग से बहती है जिंदगी की read more >>
चंदन और गुलाबों की खुशबू, मिठासी बादलों की झिलमिलाहट, इस देश की संस्कृति की शान, हिन्दी भाषा की मधुरता है जहां। ज्ञान की गंगा बहती है read more >>
राधा कृष्ण प्रेम की कहानी, आधार बनी मन की ज्वाला जगानी। गोपियों की मोहिनी राधा, बांसुरी की मधुर आवाज़ राधा। दिल में बसी प्रेम की प्य� read more >>
गुब्बारे हों, गुब्बारे हों, उड़ते रहो सदा हंसते हुए। बादलों की तरह आजमाओ आसमान, जीवन के रंगीन सपने पहनते हुए। बनो खुद उमंग का एक पल, म� read more >>
जी हां, 80 और 90 के दशक के हम सब भारतीय अपने हिंदू समाज के सभी रीति रिवाजों के साक्ष्य हैं। जैसा बचपन हमने जिया है वैसा बचपन हमारे बच्चों क� read more >>
घोंसला सीमा के घर के पीछे एक बबूल का पेड़ था। सीमा अपने कमरे की खिड़की से उसे देखती रहती थी। एक दिन उसने देखा कि एक चिड़िया बार-बार आ-ज� read more >>
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