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चाहतों के रंग- बड़े गहरे होते है
चाहतों के रंग बड़े गहरे होते है, उतरते नहीं जिंदगीभर, इतने पक्के चढ़ते हैं।
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वो मुझे प्यार नही करता-मुझे यह पता था
🦋🌼🌸🦋🌸🌼🦋 वो मुझे प्यार नही करता मुझे यह पता था। हे कुछ दिल में उसके जो मुझसे छुपा था। होगा कोई और वो जिससे वह जुडा था। मुझे ऐसा लगा ज
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संघर्ष-मत हारो हिम्मत कभी तुम सदैव रखो मन में हर्ष
मत हारो हिम्मत कभी, तुम सदैव रखो मन में हर्ष। मंज़िल नहीं है दूर तुमसे, तुम रहो करते संघर्ष। साहस को न डिगमिगाने दो, देही न रखो आ�
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वदें मातरम् अनुवाद सहित-वंदे मातरम सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
वंदे मातरम सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शस्यशामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं सुहासिनीं
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जिसके सर पर श्याम का हाथ-उसे कुछ नहीं हो सकता
जिसके सर पर श्याम का हाथ, उसे कुछ नहीं हो सकता, रखते हैं अपने भक्त की लाज, उसे गिरने नहीं देते।
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भोलेनाथ-भोलेनाथ करते हैं भक्तों के दुखों का नाश
भोलेनाथ करते हैं भक्तों के दुखों का नाश, आपसे है दरखास्त, लालच नफरत ईर्ष्या क्रोध आदि का कब करोगे महाकाल महाविनाश। क्या आप समझ गए हो इ�
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अभी दरिया है- सेलाबे समुंदर तो होने दो
अभी दरिया है सैलाबे समुन्दर तो होने दो फलक के साये मे सो रहे है बो उन्हे सोने दो । ये खाके वतन की औलादे हैं इनकी आवाज नही दबती तख्ता प�
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बड़ी ही नज़ाकत से बात करती है
यही काम है उसका जो ये दिन रात करती है प्यार मोहब्बत बड़ी ही नज़ाकत से बात करती है। डरती है शायद के कोई देख न ले उसको इसलिए छुप छुप के म
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मंद-मंद गति से गतिमान शीतलता लिए
विस्तार....शीर्षक कहीं किसी रोज उस किनारे के उस पार बजती है सुमधुर ध्वनि, र्कणप्रिय लिए विस्तार करती मन के संताप दूर करती शनै शनै...! ज�
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कुछ तो काला दाल में- सूरत पर है हर्ष
(दोहा छंद) कुछ तो काला दाल में, सूरत पर है हर्ष। बात करें वह गर्व में, फिर भी हो उत्कर्ष।। कुछ तो काला दाल में,मिलता मुझ से रोज। करता बात�
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मुझे शिकायत है-आप हमसे अक्सर मिलते ही नहीं हैं
मुझे शिकायत है बहुत आपसे क्योंकि, आप हमसे अक्सर मिलते ही नहीं हैं। एक हम हैं जो आपके इन्तजार में, आँखें बिछाये खड़े हैं यहां कब से। गज�
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शब्द अर्थ को तौलकर-कहिए अपनी बात
(दोहा छंद) शब्द अर्थ को तौलकर, कहिए अपनी बात। सुरभित हों तब जगत में,सुहावना हो रात।। शब्द अर्थ को तौलकर, कहिए अपनी बात। रहिए हरदम मग्न �
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