(मुक्तक छंद)
मिलने तुम आओ कभी,पिला नयन का जाम।
सावन की मधु रात में, हो जा मेरे नाम।
तुम मेरी हो प्रिय गजल,और मनोहर खास_
बनकर सावन की घटा,ब� read more >>
चलते - चलते ✍️✍️✍️
शायद कभी मिलें न हों..ऐसे 'किसी' से हम
जैसे कि मिल के आए हैं प्यासी 'नदी' से हम
दुनिया-जहान में थे..कभी 'लाज़िमी' से हम
र� read more >>
तोफे, लाया मे, लाया नजराने
ये तो सब है । दिवानी
तुझ से मिलने के बहाने। हो...
इस ज्यादा, और भला
एक दिवाना क्या करे......?
महीने बदलते, है। तार� read more >>