(मुक्तक छंद)
कलकल चंचल जल दिखे, बांध हुआ है भग्न।
बरसे सावन झूम के,सभी नदी जलमग्न।
मस्त सरकार सो रहे,आनन फानन काम_
सड़कों का भी लय बुरा,ज� read more >>
अब मैंने गुनाह करना छोड़ दिया ,
अब मैंने इश्क़ बेपनाह करना छोड़ दिया ,
वह निकलती है मेरे सामने से कई एक बार दिन में__
अब मैंने उसपे निगाह � read more >>
तेरे आने की आस लिए बैठा हूं ,
सूखे लवों पर प्यास लिए बैठा हूं ,
तू एक दिन मेरे पास जरूर आएगी __
ये सोंच कर तोहफ़ा कोई खास लिए बैठा हूं ।
_ शि� read more >>
तुम न गम दो मुझे और भी बहुत से गम है मुझे मुझसे दूर न जाओ कभी पास तो बैठो कुछ अपनी कहो कुछ मेरी भी सुनो क्यों फिक्र करें जमाने की क्या कभी � read more >>