(दोहा छंद)
माया ममता मोह में, जीवन हो बर्बाद।
इन सबको अब त्याग कर, खुद को कर लें साद।।
माया ममता मोह में, लगते हैं नित पाप।
भक्ति राह पे म read more >>
तेरे श्रंगारों में मैं ही तो बसता हूं,
तेरी हर अदाओं का मैं ही तो दिवाना हूं।
और कोई चेहरा ना पहचानु,
तूं ही तूं चारों तरफ_
तूं ही तूं चा� read more >>
न मैं कवि हूं ,न मैं कहानी _कार हूं ,
न गज़ल का दीवाना न गजल कार हूं ,
पर होने को सब कुछ हूं
उसी की मर्जी से__
जिस परवरदिगार का जन्मों से सेव� read more >>