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(मुक्तक छंद) तूं है मेरी लैला मैं हूं तेरा छैला। अब उम्र भर टागूं सदा मैं प्यार का थैला। और तनिक भी मुँह से आह कभी ना निकले_ तेरे लिए भर� read more >>
तेरा हुक्म जो हो जाये कैन्हया, मैं तेरे दर आ जाऊंगा, हूं मैं गरीब, तेरे दर्शन पाकर अमीर हो जाऊंगा। जय श्री कृष्णा read more >>
(मुक्तक छंद) हम तुम दोनो मिल गए प्यार का फूल खिल गया। चारों तरफ अपने प्यार का पराग फैल गया। और ये शाम_सुबह अपने प्यार के नाम हुआ_ अब तो य� read more >>
तेरे इंतज़ार में हम बैठे हैं सांवरे, तेरे दर्शन पाने को तरसे रहे सांवरे, तुम आओगे कब कैन्हया, तेरे दर पर बैठे हैं सांवरे। read more >>
किसी की मंजबूरी का फायदा ना उठाइये, एक दिन सबका आता है, करना हैं भला करे, दूसरों की नजरों में उठ जाता हैं। read more >>
मेंहनत की रोटी खाइये, दूसरों पर ‌‌ना निर्भर रहिये, करना हैं कुछ खुद करो , दूसरों के भरोसे ना रहिये। read more >>
महारानी ईश्वरी देवी गुम हो रही तुलसीपुर की महारानी ऐश्वर्य राज राजेश्वरी देवी ( महारानी ईश्वरी देवी ) यानि तुलसीपुर की रानी लक्ष्मीब� read more >>
मेंहनत की रोटी , लाजवाब होती हैं, भरता नहीं पेट दूसरों से मांगके खाने में, अपनी दो रुखी रोटी खाने में भी स्वाद आता हैं। read more >>
हम हैं मुसाफिर, चलते जा रहे हैं, मंजिल से हैं अनजान, फिर कोशिश कर रहे हैं। read more >>
तेरे दीवाने हैं हम, तेरे दर भिखारी है हम, तेरे दर्शन को तरसे, दर दिददार के भूखे हैं हम। read more >>
आमेर की स्थापना मूल रूप से ९६७ ई॰ में राजस्थान के चन्दा वंश के राजा एलान सिंह द्वारा की गयी थी।[16] वर्तमान आमेर दुर्ग जो दिखाई देता है वह read more >>
एक छोटे से गांव में एक अनपढ़ आदमी रहता था। वह गांव के सबसे गरीब परिवार से था और उसे शिक्षा की कोई सुविधा नहीं थी। उसका नाम रामचंद्र था। � read more >>
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