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(दोहा छंद) हार जीत के दाव में, फसा जगत के लोग। मन से अथक प्रयास कर,पाते सुख का भोग। जीत सुनिश्चित कर चलें,रखें सत्य का ज्ञान_ खुशियों से � read more >>
(मुक्तक छंद) हलचल करें मत यूं कि नव, तकरार हो जाए। जीना हमें है शान से, ना रार हो जाए। हसते रहें भाई यहां, जीना यही सुन्दर_ सबको निजी बात� read more >>
(मुक्तक छंद) उसके दिलों में भी सदा, ही प्यार हो जाए, मेरी अमर यह प्रीति है, इकरार हो जाए, दुनिया बने नव एक सच, का ही जहां टिकता_ सबको अगर स� read more >>
(मुक्तक छंद) घर सभी के नव खुशी, नित मान लाती बेटियां। इस धरा को गुल भरे, रंगों सजाती बेटियां। फूल सी खुशियां लगे, सब को सदा ही नन्दिनी_ र� read more >>
(मुक्तक छंद) जन्मभूमि में स्वर्ग है, उनके सब संतान। जहां बड़े होते सभी,बनते हैं इंसान। ममता अति रखती सदा,करती निर्मल प्यार_ पाले सबको � read more >>
(मुक्तक छंद) सुबह सुबह जब साथ में,पीते हैं सब चाय। रहे खुशी की शुभ घटा, मिट जाते हैं हाय। आपस में हो प्रेम तब, रहे सुखी परिवार_ फिर जीने क� read more >>
(मुक्तक छंद) होना भी तो चाहिए,पड़ा जेब में नोट। इच्छा सब ही पूर्ण हो, करूं खुशी से वोट। फिर तो सबका साथ हो,मिलती विजय हजार_ देवलोक है तब � read more >>
मुक्तक छंद हारे का हरि नाम है, मन को रखिए शांत। धीरज रखना छोड़ मत,हरि तो हैं अतलांत। होना नहीं निराश है, तृप्त करें हरि प्यास_ पूर्ण कर� read more >>
मैं खुद आईना हूँ तु आईनें से बात मत कर। मैं तेरी ही परछाई हूँ तु आईनें पर विश्वास मत कर। मैं कब बदलूँगा,खुद को तु खुद को आईनें में देखक� read more >>
कविता- अब जाग उठी है तरुणाई। रचना- जितेन्द्र शर्मा पुष्पित हुआ है फिर से उपवन, सुगंध विश्व में फैलाई। चंद्र तारे भर आंचल में, धरा पर � read more >>
आह ! वेदना...... वो सूनी रेलिंग.... अंतहीन इंतजार..... काश! आते तुम और महका जाते मेरी पीड़ा। जाते समय पुर- उम्मीद लौटे तो न-मुराद। हर रोज ही न� read more >>
सभी कोई अच्छे होते हैं, बस बिना जरूरत के लोग बुरा बन जातें है। read more >>
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