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गर्मी का मौसम अभी-तापमान है गर्म
(दोहा छंद) गर्मी का मौसम अभी, तापमान है गर्म। बदन पसीना मय रहे,चाहत रहती नर्म।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देव�
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वो बचपन जाने कहां गुम हो गया है-जाने वो शैतान कहां खो गया है
मासूमियत भरे चेहरे के पीछे एक शैतान हुआ करता था, और वो शैतान भी कितना नादान हुआ करता था, अपनी छोटी छोटी शरारतो से सबको परेशान किया करत�
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घुंघट में हैं राधा-मुकुट में हैं श्याम
घुंघट में हैं राधा, मुकुट में हैं श्याम, लगे चांदनी राधा, चांद लगे श्याम।
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गुलशन मय हो तब धरा-खिले सभी की साध
(दोहा छंद) गुलशन मय हो तब धरा,खिले सभी की साध। मिले सभी को न्याय तो, होगा कम अपराध।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(
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होनी टाले कब टली-फिर भी करें न शोक
(दोहा छंद) होनी टाले कब टली,फिर भी करें न शोक। रखिए साथ उमंग को,खुशी मिले बेरोक। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(दे�
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अटखेली बाला करे-गाती दिलकश गीत
(दोहा छंद) अटखेली बाला करे,गाती दिलकश गीत। देती है अदभुत खुशी,लगे रम्य संगीत।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(दे�
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तेरी मन्द मीठी मुस्कान-कान्हा हमको तड़पाये
तेरी मन्द मीठी मुस्कान, कान्हा हमको तड़पाये, तूझसे मिलने को कान्हा, तेरी याद सताये।
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अटखेली में डूबकर- मैंने देखा खूब
(दोहा छंद) अटखेली में डूब कर, मैंने देखा खूब। भागे तब दुखड़ा सभी,लगूं भव्य महबूब।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(
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चाहत कभी न यूं मरे-जिन्दा दिल हर पल रहें
(कुंडलिया छंद) चाहत कभी न यूं मरे, बड़े स्वप्न को देख। जिन्दा दिल हर पल रहें, प्राण बने नव लेख।। प्राण बने नव लेख,जिसे पढ़कर सब सीखे। और
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मानवता ही धर्म है-प्यार सदा अनमोल
(कुंडलिया छंद) मानवता ही धर्म है,प्यार सदा अनमोल। करे कर्म से याद जग,मीठे रखते बोल।। मीठे रखते बोल,रहे सबसे वह आगे। बनते दिव्य मिशाल,स
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मनोदशा मजदूर की-दृढ़ उसमें है जोश
(दोहा छंद) मनोदशा मजदूर की,दृढ़ उसमें है जोश। साहस रखता खूब है,हरदम रखता होश।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देव�
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बरसात की एक रात- मेरे दिल में अंकित है
बरसात की एक रात मेरे दिल में अंकित है, और शायद जीवन भर भी अंकित ही रहे। अमावस्या की काली रात और खूब बारिश, आधी रात से भी ज्यादा का वक्त र�
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