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साक्षरता और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं सार्वजनिक पुस्तकालय ज्ञान और संस्कृति के प्रवेश द्वार के रूप में, पुस्तकालय समाज म read more >>
सूरज का प्रचण्ड रूप सूरज का यह, प्रचण्ड रूप उगलती आग, यह कड़क धूप त्राहि–त्राहि हैं,सब जीव–जंतु देख मार्तण्ड का, यह अनल रूप मानो धर� read more >>
मोबाइल और हम यह नया जगत है, इसमें दूरभाष सरल होता है कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट से, बात सरल होता है चिट्ठी, बैरन, पोस्टकार्ड का, बात नहीं read more >>
करोना क्या था करोना गई दिन बदला,सब काम धंधे में व्यस्त हुएं भाग दौड़, आपाधापि, अपने अपनो में मस्त हुएं करोना क्या था ?, क्या था करोना? � read more >>
एक प्यारी सी बच्ची चालीस - बयालीस साल की घरेलू स्त्री थी सीमा जी का भरापूरा परिवार था । धन - धान्य की कोई कमी नहीं थी । सुधा भी ख़ुश ही थी read more >>
बुढ़ापे का सहारा सीमा... आखिर बात क्या है कल से देख रहा हूं तुम बार - बार छत पर जाती हो ... कई बार छत से चढ़ते - उतरते हुए देखकर आखिरकार दिनेश read more >>
एक शहर मे सेठ रहता था ! सेठ कभी भी अपनी धन सम्पती पर घमण्ड न किया ! वह एक समाजिक विकास करने के लिए हमेशा तत्पर रहता था !किसी के भी के दुख दर्� read more >>
मेरे घटा तु भुल न जाना पंछी तु उड न जाना हम चल पडे है,खेतो में मौसम बईमान तु चल न आना पंछी अपने घोसला मे खुब चहचहा रही कोयल अपनी बानी स read more >>
झर-झर बरसे नयन हमारे ज्यूँ झर-झर बदरा बरसे रे पिया मिलन को आतुर अंखियाँ, हाय रे ! कब से तरसे रे दरद जिया का सह नहिं जाए, सुध बुध तन बिसराई � read more >>
" पितृ सम्मान " रात के दस बज रहे हैं और तुम अभी तक घर नहीं लौटे ... ?  कल से तुम्हारा बाहर जाना बंद ... ! ! यह कमरे में धुंंआ किस चीज का है ... ? सिगर read more >>
अनमोल धरोहर डैडी... आज आपके रखें नये ड्राइवर ने मेरे साथ बदतमीजी की ... देर शाम लौटी जांहवी ने अपने पापा को बाहर हाल में बैठे हुए देखकर शि� read more >>
जब हृदय उद्विग्नताओं से परिपूर्ण हो जाता है। एवं उसमें और अधिक व्यथित भावनाओं को समाहित कर पाने की पराकाष्ठा नष्ट हो जाती है, तो उर � read more >>
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