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(दोहा छंद) पावन विचार से मिले,दुनिया की हर हर्ष। खुशियों में जीवन कटे, नित ही हों उत्कर्ष।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_सम read more >>
पुराने समय में एक किसान की फसल बार-बार खराब हो रही थी। कभी तेज बारिश की वजह से, कभी तेज धूप की वजह से, कभी ठंड की वजह से उसकी फसल पनप नहीं प� read more >>
हम अपना हक उन पर जताने निकले , वहां देखा तो वह कमाने निकले , छोड़ देते जिन्दगी बसर के लिए ___ हम भी ऐसे उनके दीवाने निकले । ____ शिव किशोर ,शाह� read more >>
नन्हा आशिक़ पिता से चिपका अंश सिसक पड़ा।जगमोहन बाबू और अथर्व कुछ समझ न पाएं। थोड़ी देर में अंश पहले की भांति दादा साथ खेलने लग read more >>
. "राधाजी की कृपा" चन्दन वृंदावन की ब्रज भूमि में रहने वाला अपने माँ-बाप का इकलौता बेटा था। दिन भर वो ब्रज की रज में लोटपोट � read more >>
जिसके बिना जिंदगी अधूरी सी लगती है जिसके बिना शाम भी यूं ही खाली सी रहती है ! जिसके बिना सुबह का इंतजार भी नहीं होता है । जिसके बिना राह read more >>
अपनों के पास आना भी सीखो अपनों से दूर जाना भी सीखो जो तुम्हारी कदर ना करें उससे दूर रहना भी सीखो जो तुम्हारी कदर करे उसे अपनाना भी सीखो read more >>
चलो न तुम भूले ना हम भूले किसी से आपकी शिकायत क्यों करें जिंदगी की उस मोड़ पर फिर से यूं चले जहां से सफर शुरू किए थे याद आने का वादा किए थ� read more >>
कभी कभी खुद से ही मन यह प्रश्न करता है ! कि आप मेरी जिंदगी में आए ही क्यों ? जब आपको मुझसे दूर जाना था! मुझे इतनी सपने दिखाए ही क्यों? जब इन read more >>
कभी-कभी मन सोचने पर यह मजबूत करता है! कि जिस इंसान के साथ हम रहते हैं कभी कभी उन रिश्तो से हमारी इतनी दूरी बढ़ जाती है ।कि हम उनको देखना read more >>
जीवन में इतना सन्नाटा पसरा क्यों है ? कई वर्ष पहले यह सन्नाटा मुझे दिखता क्यों न था ? सुबह उठते ही चिड़ियों की चहचहाहट से मेरी नींद खुलत read more >>
संबंधों का कोई मोल नहीं है सभी के अपने मापदंड हैं ! सभी ने अपने मापदंड बदले! सबने खोई है संबंधों की प्रासंगिकता ! छोड़कर पुरानी परंपरा � read more >>
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