कविता संग्रह
1 बिछड़न.........
जब अगले साल यही वक़्त आ रहा होगा...
ये कौन जानता है कौन किस जगह होगा...
तू मेरे सामने बैठा है और मैं सोचता ह� read more >>
अब तो ख़ुशी के नाम पे कुछ भी नहीं रहा
आसूदगी के नाम पे कुछ भी नहीं रहा
सब लोग जी रहे हैं मशीनों के दौर में
अब आदमी के नाम पे कुछ भी नहीं रह� read more >>
*मेरी डायरी*
सरिता के विवाह की तैयारी जोरो - शोरों से चल रही थी... मेहमान आ गये थे... घर में बहुत रौनक थी... पर पिताजी का तो दिल बैठा जा रहा था read more >>