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आज गगन में उड़ते पंछी को देखकर न जाने क्यों? मन यह सोच रहा है ! कितना ही अच्छा होता! अगर बन जाते पंछी हम! मस्त निर्भीक! होकर मस्त ! गगन मे read more >>
न जाने मन में उठते हैं क्यों? हजारों सवाल ! न जाने दिल क्यों? आज कह रहा है !कह दूं मैं भी कुछ अपने दिल का हाल! कहने को बहुत कुछ है! मगर जुब read more >>
बचपन .........एक जमाना था जब हम भी बच्चो की श्रेणी में आते थे मां बेशक उठाती रहे हम चादर तान फिर सो जाते थे जब स्कूल से छुट्टी चाइए होती थी प read more >>
मर्दों जैसी औरत एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में एक महिला रहती थी। उसका नाम रेखा था। वह गांव की सबसे प्रसिद्ध वैद्य भी थीं। रेखा ने read more >>
"उन्होंने इतला- तो किया था...शांति, तुम्हारे हृदय में स्थापित है,, "जब भी तुझे मेरी- याद सताए मैं वहीं मिलूंगा....!! -मोती read more >>
..तुम्हारा दीदार चाहता हूं- सहारा और ज़िक्र चाहता हूं..अब,, ..जमाने की ठोकरें- कहां तक सह पाऊंगा..अब,, ..इसलिए- तुझे सरेआम चाहता हूं..अब,, ..� read more >>
तुम्हारा पता में- रब का नाम लिखा है,, रब का पता में- तुम्हारा नाम लिखा है,, तुम्हारा शरीर ही- उसका ठिकाना है, ये वाक्या सरेआम लिखा है...!!! read more >>
Such strange words That quiet April day brought me. You knew it was still alive in me, That dreadful week of passion. I heard no pealing of bells, Floating in clear azure, For seven days copper laughter chimed, Silvery sorrow streamed. And I, veiling my face, As if for eternal parting, Lay, awaiting there The still-nameless torment. read more >>
मुट्ठी भर लोग ! साहस पर कहानी हर साल गर्मी की छुट्टियों में नितिन अपने दोस्तों के साथ किसी पहाड़ी इलाके में माउंटेनियरिंग के लिए जात read more >>
तुझ से नजर मिला के जिन्दगी मदहोश है, तुझ से नजर मिला के जिन्दगी मदहोश है। साया बनकर तूं साथ चल रही हो, साया बनकर तूं साथ चल रही हो। आजकल read more >>
जीवन अनुसंधान है, यहां खजाना खूब। जितने चाहें खोज लें,बनकर दृढ़ महबूब।। जीवन अनुसंधान है,जिसमें भव्य रहस्य। जितना खोजें हम सभी,बने� read more >>
हर ओर दिवाली है, जगमग दीप जलते हैं जाने कितने सबके, रह - रह के सपने पलते है। शमां जल बुझ रहे रहे, ख्वाब न बुझ पाया। दीपक दिल का जलता है, read more >>
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