फ़टे मटमले कपड़े उनके, तन का वस्त्र भी है ना इनके
दिन-रात का ना ठिकाना, ठीक से हो ना खाना-पाना
बच्चे के लिए वो अड़ जाता, रिक्शे पे जिंदगी सड़ ज read more >>
ऐ बसंती पवन तू क्यू बार बार उसकी खुस्बू की बहार लेकर आती है , क्या तुझे पता नहीं है कि अब मै उस खुसबू को भूलने की कोशिश कर रहा हूं , तू क्यू read more >>