पिता ने बेटे से कहा, "तुमने बहुत अच्छे नंबरों से ग्रेजुएशन पूरी की है। अब क्यूंकि तुम नौकरी पाने के लिए प्रयास कर रहे हो , मैं तुमको यह का read more >>
कसम
खाओ तो विद्या माता की कसम....
हो सकता है हम में से किसी ने कान्वेंट में पढ़ा हो, किसी ने विद्या मंदिर में या मेरी तरह सरकारी स्कूल मे� read more >>
बचपन की पढ़ाई
कितने याद आते हैं वह बीते हुए दिन नादान थे समझ नहीं था मासूम थे किसी के लिए जलन भावना नहीं था बस खुशियां बहुत थी गम कुछ भी � read more >>
"घर का सम्मान.....
चालीस पार मोहन ने आखिर अपने आँफिस की सहकर्मी सुधा से शादी कर ही ली....सुधा जहां एक अनाथ लडकी थी अपने चाचा चाची के पास पली ब� read more >>
अटूट विश्वास
*रात के ढाई बजे थे, एक सेठ को नींद नहीं आ रही थी । वह घर में चक्कर पर चक्कर लगाये जा रहा था। पर चैन नहीं पड़ रहा था । आखिर थक कर read more >>