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ਦੇਸ਼ ਦੀ ਸਿਹਤ ਡਾਕਟਰਾਂ ਅਤੇ ਦਵਾਈਆਂ ਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਜੂਝ ਰਹੀ ਹੈ। ਇੱਥੇ ਹਰ 10,000 ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਸਿਰਫ਼ ਇੱਕ ਐਲੋਪੈਥਿਕ ਡਾਕਟਰ ਉਪਲਬਧ ਹੈ ਅਤੇ 90,000 ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਇੱਕ ਸਰਕਾਰ� read more >>
डॉक्टर और दवाइयों की कमी से जूझता देश का स्वास्थ्य प्रत्येक 10,000 लोगों के लिए केवल एक एलोपैथिक डॉक्टर उपलब्ध है और 90,000 लोगों के लिए एक स� read more >>
*बेलगाम शिक्षा व्यवस्था: किताबों में कमीशन का खेल, अभिभावक रहे झेल* स्कूलों की मनमानी, किताबें बनी परेशानी। निजी स्कूल बने किताबों क� read more >>
मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) अभी तो सिर्फ पैरों पर खड़ा हुआ हूँ अभी तो चलना बाकी है। लड़खड़ाते पैरों का संभालना तो अभी बाकी है। कभी गिर read more >>
(सचिन कुमार सोनकर ) मेरे पास आना हो तो सब कुछ छोड़ कर आना। क्योंकि तेरे और मेरे दरमियाँ, हवाओं को भी आने की इजाजत नही। read more >>
VISPOT IN SPACE That day was 18 August 2085. I had to go for research in space. I was very happy. Today my dream was coming true, I was thinking while sitting in the space shuttle, then thunderous applause started coming from outside. And the space shuttle was launched, I was moving towards space very fast. Now I had to go far away, probab read more >>
अच्छे है। लोग इतनी खुबसुरती के बाद भी ......2 बस मौका तो मिलें ,हाँ बस, मौका तो मिले नज़र चुरा के माली से फूलो को मसल दिया करते है। read more >>
मैं कोई सायर नही जो मै सायरी लिखता हु मुझे लिखने का शौक है शायद इस लिए मै लिखता हु लोग बातो को बनाते है हम हकीकत को दिखाते है ज्यादा फर� read more >>
तन से हो कर- ये पवन गुजरती जा रही है हरेक सांसों में- उसकी कृपा जो आ रही है हमें क्या खबर है- कौन सी क्या करिश्मा है अपने-आप जीवन- दान म� read more >>
जीवन डोर बंधा है- प्रेम उसी से करते हैं सब! रहता है- सबके दिलों में, यही तो है वह मंदिर जहां जाना है हर किसी को! -मोती read more >>
जो दुख हम- झेलते हैं इस जीवन में, कहीं ना कहीं- कारण हम खुद ही हैं। अभूतपूर्व सुख- के भागी बन सकते हैं, निकाल दें- अपनी कमी इस जीवन से।। read more >>
अपनी-अपनी नज़रिया है! वो जो हैं- लाजवाब होंगे जो देखते हैं मैं यह नहीं कहता- अपनी-अपनी नज़रिया है जब-जब मैं- देखता हूं यक़ीनन मुझे यह, read more >>
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