कहानी – पुन्नों रानी।
लेखक - जितेन्द्र शर्मा
तिथी - 15/01/2023
हमारे समाज में विवाह - शादियों का अलग ही अर्थशास्त्र है। दहेज से लेकर दावत त read more >>
पुरुष कठोर क्यों
पुरुष इतना कठोर भी नही होता ,
वो सिर्फ बाहर से दिखता है ,
दिल का बहुत कोमल वो होता है ,
कठोर होना उसकी मजबूरी है ,
वो परि� read more >>
न कोई गम न किसी गम की खबर!
और कहते हैं दिल के सच्चे होते हैं!
सच में दिन तो बचपन के अच्छे होते हैं!
खेल में यू मगन कि पूरा दिन एक पहर लगता � read more >>
भींच दूंगा मैं उसे जो द्वंद में शत्रु है l
स्थिति भले हो मरण की ,
भले हो कटना खंड खंड भी l
मरणासन्न में ही सही ll
होगा विजय का जयघोष भी,
भले � read more >>